2018 के बजट में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आवंटन में काफी बढ़ोत्तरी की जा सकती है. आगामी आम चुनाव एवं 8 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में राजनीति के मद्देनजर यह किया जायेगा. सबसे अधिक कर मोदी सरकार को सवर्ण जातियों (ब्राह्मण + क्षत्रिय + कायस्थ + वैश्य) के नागरिक देते हैं और यही वर्ग भाजपा का वोट बैंक भी है किन्तु मोदी सरकार बजट में इनका कोई भी प्रावधान अलग से नहीं करती है बल्कि अवर्णों के लिए अलग से प्रावधान किये जाते हैं.
नीति आयोग ने इस सम्बन्ध में एक योजना बनाई है. इस योजना के लागु होने पर अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के कल्याण पर खर्च बढ़ने की उम्मीद है. नीति योग ने सभी मंत्रालयों एवं विभागों से कहा है की वे उन योज्नावों की समीक्षा करें जिनमे एस टी और एस सी समुद्यों के लिए अलग से कोई आवंटन नहीं किया जाता है, लेकिन सब्सीडी जैसे जनरल कॉम्पोनेन्ट में एससी, एसटी व्यय को शामिल किया जाता है.
2016-17 में अनुसूचित जातियों के लिए कुल आवंटन 30600 करोड़ रुपये था जो 2017-18 में बढाकर 52400 करोड़ रुपये कर दिया गया.
2016-17 में अनुसूचित जनजातियों के लिए कुल आवंटन 21200 करोड़ रुपये था जो 2017-18 में बढाकर 32000 करोड़ रुपये कर दिया गया.
पब्लिक पोलिटिकल पार्टी ने संभावित बजट की विरोध करते हुए कहा है की 2019 के लोकसभा चुनावों में सवर्णों के उपेक्षा करना भाजपा को भरी पड़ेगा.
