पब्लिक पॉलिटिकल पार्टी (पपोपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री दीपमाला श्रीवास्तव ने सोमवार को जारी अपने एक बयान में कहा की योगी सरकार ने ३३ हजार पदों के लिए जो भर्ती निकाली है वह असल में एक चुनावी झुनझुना है. वह जानती है की उसके दिन गिनती के बचे हैं अतः फर्जी नौकरियां निकालकर वह बेरोगार जनता से आवेदन शुल्क वसूल ले. २०१६ से अभी तक सात परीक्षाएं हुई किन्तु अभी तक उनका कोई परिणाम नहीं आया. कनिष्ट सहायक और कनिष्ट लिपिक – २०१६, आबकारी सिपाही – २०१६, सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा (||) -२०१६, होम्योपथि फार्मासिस्ट – २०१९, कम्पुटर ओपरेटर – २०१६, कनिष्ट सहायक – २०१९, आशुलिपिक – २०१८ के परिणाम अभी तक नहीं आए. उत्तर प्रदेश के बेरोजगार लोग कभी क्यूँ नहीं पूछते  की अभी तक इन भर्तियों का परिणाम क्यूँ नहीं आया, नियुक्ति तो दूर की बात है. नई भर्ती निकालने की जरूरत क्या है? पब्लिक पॉलिटिकल पार्टी ने अपने २०२२ के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में एक करोड़ सरकार नौकरियां देने का वादा किया है. प्रदेश की रोज़गार विरोधी योगी सरकार कभी भी सरकारी नौकरी नहीं दे सकती है.

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