अभी समाचार ये है कि उत्तर प्रदेश के पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में पेंडल और पेट्रोल और डीजल से चलने वाले जुगाड़ रिक्शाओं को हटाया जाएगा, इसके स्थान पर ई रिक्शा को बढ़ावा दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग नीति में प्रस्तावित संशोधनों में इसकी व्यवस्था की जाएगी । अपर मुख्य सचिव औधोगिक विकास अरविंद कुमार की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग नीति 2019 में संशोधन को लेकर बैठक हुई थी इनमें कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। इसमें शहरों में ई-रिक्शा को बढ़ावा देने पर भी विचार विमर्श किया गया। इसमें सुझाव दिया गया कि नगर विकास विभाग द्वारा पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाला शहर में एक समय सीमा के भीतर ई-रिक्शा होने का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। इसके लिए वर्तमान में मानव पैडल चालित रिक्शाओं, डीजल व पेट्रोल से चलने वाले रिक्शा को ई रिक्शा में परिवर्तन किया जाएगा। लेकिन यह निर्णय लेते हुए क्या इन्होंने सोचा कि गरीबों के रोज़गार का अंतिम विकल्प रिक्शाओं को भी समाप्त करने पर तुल गए हैं। पब्लिक पोलिटिकल पार्टी का कहना है कि
भाजपा की सरकारें लोगों को बेरोज़गार करने के लिए तरह तरह की हरकतें और कार्य करती रहतीं हैं। उसी का एक भाग है ये फ़ैसला क्योंकि एक पैडल रिक्शा जो कुछ ही हज़ार रुपए में आ जाता है। वहीं इलैक्ट्रिक रिक्शा लाख रुपए तक आता है जिसे वह गरीब कैसे खरीद पाएगा। अतः बेचारा रिक्शा चलाने वाला भी बेरोज़गार हो जाएगा। ऐसी बेरोज़गारपरक नीति की पब्लिक पोलिटिकल पार्टी निंदा करती है

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