नए इतिहास का सृजन नाम से नहीं, कर्म से होता है : दीपमाला श्रीवास्तव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल विस्टा के राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच के मार्ग का नाम ‘‘कर्तव्य पथ’’ करते हुए उद्धाटन किया और इंडिया गेट के पास स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया और अपने शब्दो में इसे ‘‘ऐतिहासिक’’ और ‘‘अभूतपूर्व’’ करार दिया।
उन्होंने पूर्ववर्ती ‘‘राजपथ’’ को गुलामी का प्रतीक बताया है। कर्तव्य पथ का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुलामी का प्रतीक किंग्सवे या राजपथ अब इतिहास में समा गया है। पीएम ने कहा कि ‘‘आज कर्तव्य पथ के रूप में नए इतिहास का सृजन हुआ है। मैं सभी देशवासियों को आज़ादी के इस अमृतकाल में गुलामी की एक और पहचान से मुक्ति के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘‘कर्तव्य पथ’’ के उद्घाटन और नेताजी की प्रतिमा के अनावरण से आज़ादी के अमृत महोत्सव में देश को आज एक नई प्रेरणा और नई ऊर्जा मिली है। बजट पेश करने की तारीख से लेकर अंग्रेजों के ज़माने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को बदले जाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए देश की क्षेत्रीय भाषाओं को तरजीह दिए जाने का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में एक के बाद एक ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जिन पर नेताजी के आदर्शों और सपनों की छाप है। उन्होंने कहा, कि आज हम गुज़रे हुए कल को छोड़कर, आने वाले कल की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आज जो हर तरफ ये नई आभा दिख रही है, वो नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है।’’ इस दौरान पीएम ने कहा कि भारत यदि सुभाष चंद्र बोस के दिखाए रास्ते पर चला होता, तो नयी ऊंचाई पर पहुंच गया होता, लेकिन दुख की बात है कि उन्हें भुला दिया गया। उन्होंने कहा, कि यह अवसर ऐतिहासिक है, अभूतपूर्व है।’’ पीएम मोदी ने कहा, कि‘आज भारत के आदर्श अपने हैं, आयाम अपने हैं। आज भारत के संकल्प अपने हैं, लक्ष्य अपने हैं। आज हमारे पथ अपने हैं, प्रतीक अपने हैं।’’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुराने कानूनों को निरस्त करने सहित कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ये परिवर्तन केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह नीतियों का हिस्सा है। राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था, जिसके भारतीय गुलाम थे। अब इसकी वास्तुकला के साथ-साथ भावना भी बदल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण में लगे श्रमिकों की सराहना करते हुए कहा कि उनको समर्पित विशेष गैलरी होगी।
प्रधानमंत्री ने नेताजी को ऐसा ‘‘महामानव’’ बताया जो पद और संसाधनों की चुनौती से परे थे और जिनकी स्वीकार्यता ऐसी थी कि पूरा विश्व उन्हें नेता मानता था। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि ऐसे साहसी, स्वाभिमानी, दूरदृष्टि, विचार, नेतृत्व की क्षमता और नीतियों का ज्ञान रखने वाले नेताजी को आज़ादी के बाद भुला दिया गया और उनके विचारों को तथा उनसे जुड़े प्रतीकों तक को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।
पब्लिक पोलिटिकल पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपमाला श्रीवास्तव ने कहा कि पीएम मोदी ने बातें और जुमले बाज़ी की जुगलबंदी तो बहुत अच्छी तरह की है लेकिन ज़रा बताएं कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को कौन भारतीय अपना गौरव नहीं मानता है। उनकी प्रतिमा का अनावरण देश में कोई पहली बार नहीं हुआ है। पीएम मोदी जी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की शान में अपने लच्छेदार शब्दों का प्रयोग करके कोई नया काम नहीं किया है। नेताजी देश के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक हैं।हर देशवासी उनका ऋणी है। यदि मोदी जी की सरकार उनके नाम से कोई स्कूल, मैडिकल संस्थान, या जनहित का सेंटर खोलते तो हम मानते कि वह कुछ व्यवहारिक कर रहे रहे हैं। मूर्ति अनावरण और भाषणों का सिलसिला तो आज़ादी के बाद से ही चला आ रहा है। उनसे पहले के प्रधानमंत्रियों ने उनसे भी अच्छे विचारों को नेताजी के लिए प्रकट किया है। मोदी जी कथनी और भाषणबाजी छोड़कर कुछ लोगों की भलाई के लिए व्यवहारिक करके दिखाइए।
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