नई दिल्ली।
देश के कर्नाटक राज्य में एससी/एसटी के आरक्षण को बढ़ाना सवर्णों के ख़िलाफ़ एक साज़िश है उक्त विचार पब्लिक पोलिटिकल पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती दीपमाला श्रीवास्तव ने व्यक्त किए हैं और कहा है कि आरक्षण का लगातार बढ़ाते रहना जहां सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले में दिए आदेश की अवहेलना है वहीं देश के सवर्ण समाज के साथ अन्याय और साज़िश है। ज्ञात रहे कि कर्नाटक सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एससी एसटी के लिए आरक्षण बढ़ाने के अध्यादेश की जगह विधानसभा में एक विधेयक पेश किया, इस अध्यादेश के जरिए अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण 15% से बढ़ाकर 17% जबकि अनुसूचित जनजाति के लिए 3% से बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। यह अध्यादेश 23 अक्टूबर को जारी किया गया था। राज्य मंत्रिमंडल ने 8 अक्टूबर को एससी/ एसटी आरक्षण बढ़ाने के लिए अपनी औपचारिक मंजूरी दी थी। इस विधेयक के मुताबिक मामला बेहद जरूरी था राज्य विधानमंडल के दोनों सदन सत्र में नहीं थे इसलिए अध्यादेश जारी किया गया था एससी एसटी के लिए आरक्षण बढ़ाने का निर्णय हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज एच.एन. नागमोहन दास की अध्यक्षता वाले आयोग की सिफारिशों के बाद लिया गया था। विपक्षी दलों को इस विधेयक को लेकर सरकार की मंशा के बारे में संदेह है क्योंकि आरक्षण में बढ़ोतरी 1982 के इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से 50% की सीमा का उल्लंघन होगी।

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