नई दिल्ली।
सवर्ण समाज और राष्ट्रहित वाली पब्लिक पोलिटिकल पार्टी ने एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा का विरोध करते हुए कहा है कि चुनाव लोकतंत्र का आधार हैं इसलिए देश में बार-बार चुनाव कराने की ज़रूरत है क्योंकि इससे राजनीतिक दलों को नियमित रूप से अपने वादों को लेकर मतदाताओं के सामने जाने का अवसर मिलता है।
पब्लिक पोलिटिकल पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती दीपमाला श्रीवास्तव ने कहा कि देश को
अभी बहुत सारी व्यवस्था को ठीक करना है। जो भाजपा की सरकार कर नहीं पा रही है। वह अभी तक सभी को समान अवसर तो उपलब्ध करा नहीं पाए हैं और नये नये शगूफे छोड़ रहे हैं। देश से अशिक्षा, बेरोज़गारी, बीमारी, उत्पीड़न और बलात्कार तक तो मिटा नहीं पाए हैं।‌ सभी के लिए समान चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाए हैं। और बात करते हैं एक देश,एक चुनाव की।
श्रीमती दीपमाला श्रीवास्तव ने कहा कि पब्लिक पोलिटिकल पार्टी भाजपा को, कभी भी देश में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रणाली लागू करने की अनुमति नहीं दे सकती। क्योंकि ये सच्चाई है कि राजनीतिक दल और राजनेता लोगों की बात चुनाव की गरज़ से ही तो सुनते हैं और चुनाव के लिए ही जनता से वादे और घोषणाएं करते हैं। अगर सभी चुनाव एक साथ होंगे तो राजनेता चुनाव से सिर्फ़ छह महीने पहले ही मतदाताओं के पास जाएंगे। अगर एक राष्ट्र, एक चुनाव की यह अवधारणा लागू हो गई तो राजनीतिक दलों के नेता पूरे निरंकुश और बेफिक्र होकर अगले चुनाव आने तक लंदन, पेरिस और विदेशों में घूमेंगे और चुनाव से ठीक पहले जनता के बीच पधारेंगे।
पब्लिक पोलिटिकल पार्टी का मानना है कि लोकतंत्र का आधार ही चुनाव हैं और वह देश में बार-बार होने चाहिएं।
श्रीमती दीपमाला श्रीवास्तव ने विपक्षी दलों द्वारा ‘इंडिया’ गठबंधन बनाए जाने के बाद इंडिया (देश) का नाम बदलकर ‘भारत’ करने के भाजपा के प्रयासों की भी आलोचना की।

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