नई दिल्ली।
हमारे युगपुरुष और देशरत्न और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की हर वस्तु हमारे मान सम्मान और गरिमा की प्रतीक है। देश की बहुमूल्य धरोहर है। लेकिन अगर वह विदेश में हो और वहां नीलामी की जा रही हो, तो वह कितने शर्म की बात है ये हर देशप्रेमी अच्छी तरह समझ सकता है। ऐसा ही मामला है देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की चोरी हुई घड़ी का,जो अचानक चोरी हो गई थी और इसका पता भी तब चला जब उसे सरेआम नीलाम करने के लिए स्विट्जरलैंड की एक नीलामी संस्था ने घोषणा की। पब्लिक पोलिटिकल पार्टी के फाउंडर लोकेश शितांशू श्रीवास्तव ने कहा कि देश की धरोहर बाबू डॉ राजेंद्र प्रसाद की चोरी हुई घड़ी को तुरंत भारतवर्ष लाया जाना चाहिए। उसका स्विट्जरलैंड में नहीं भारत में स्थान है। वह भारतवर्ष का मान सम्मान है।
आपको बता दें कि डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की हाथ की घड़ी जिसे किसी ने चुरा लिया था और उस घड़ी की नीलामी के लिए जब स्विट्जरलैंड में घोषणा हुई तो भारत में इसका पता चला। और डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के प्रपौत्र ने इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए नीलामी रोकने और घड़ी को वापस भारत लाने की मांग उठाई। जिसकी बाद नीलामी तो रोक दी गई लेकिन घड़ी अपने देश भारत वापस अभी तक नहीं लाई जा सकी। मामला संसद के सदन राज्यसभा में भी गूंजा है। गोरखपुर के रहने वाले डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने सदन में सवाल उठाया कि क्या सरकार देश की अस्मिता को वापस लाने का काम करेगी। इस पर विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि वह इसकी जानकारी कर सदन को जवाब देंगी।
ज्ञात रहे कि गोरखपुर में रहने वाले डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के प्रपौत्र डॉ अशोक प्रसाद ने इस घड़ी के बारे में बताया है कि घड़ी के चोरी होकर स्वीटजरलैंड पहुंचने की जानकारी 2011 में उस समय हुई जब जिनेवा के प्रमुख नीलामी घर संस्था सथबी ने 13 नवंबर 2011 को घड़ी नीलाम करने की घोषणा की। इसके बाद डॉ अशोक ने स्विट्जरलैंड स्थित तत्कालीन भारतीय राजदूत चित्रा नारायण को दो बार ईमेल भेजकर नीलामी रुकवाने और घड़ी को वापस भारत लाने का आग्रह किया।
डॉ अशोक के अनुसार उन्होंने भारतीय राजदूत को ईमेल के माध्यम से यूनेस्को के चार्टर का भी संदर्भ दिया, जिसके माध्यम से भारत सरकार को नीलामी रोकने के लिए दखल देने का अधिकार था। इसके बाद भारत सरकार के हस्तक्षेप पर नीलामी तो रोक दी गई लेकिन घड़ी की देश में वापसी की प्रतीक्षा की घड़ी ख़त्म नहीं हुई है।
डॉ राजेंद्र प्रसाद के प्रपौत्र डॉ अशोक प्रसाद ने इस संबंध में कहा है कि डॉ राजेंद्र प्रसाद की विरासत घड़ी की मोहताज नहीं है लेकिन बात राष्ट्रीय संपत्ति की है जिसे वापस लाया ही जाना चाहिए। डॉ अशोक ने जानकारी देते हुए बताया है कि रोलेक्स कंपनी ने 26 जनवरी 1950 को भारतीय गणतंत्र के जन्मदिन पर 18 कैरेट सोने की कलाई घड़ी देश के पहले राष्ट्रपति को उपहार में दी थी। यह घड़ी राष्ट्रपति भवन या पटना के सदाकत आश्रम में हो सकती थी। लेकिन घड़ी कब और कहां से चोरी हुई इसकी जानकारी नहीं है।

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